जीत क्या है

जीत क्या है:- जो खुद के लिए नहीं सबके लिए एक सुखद परिवर्तन की कोशिश में दिन-रात कार्य कर रहा है जिसके अंदर करूणा प्रेम सहयोग त्याग सदाचार और सबके लिए एक अच्छी सोच हो मेरी नजर में वही जीत हैं

जो खुद के फायदे को रखें ऊपर

करे जो केवल अपनी ही बात

हारता वो सदा अक्सर

जो करें अपने अहम से शुरूआत

जो औरो के लिए लड़े हर क्षण

चाहे दिन हो या हो रात

वहीं बनता विजेता जो करें

खुद से बदलने की खुद से

ही एक नयी शुरुआत

जीत के मायने :- किसी भी विजेता के जीत के मायने तभी सार्थक है जब वो एक बेहतर समाज को बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है

समाज वैसा ही बनेगा जैसा हम सोचेंगे जो नयी सोच के साथ लोगों को परिवर्तित होने के लिए प्रेरित करें वहीं तो विजेता का सबसे प्रभावशाली कार्य है

जो समाज में फैली कुरितियां के खिलाफ खड़ा होता है वही विजेता हैं हम तभी वास्तव मे सफल है जब हमारे आस पास के लोग सफल है

जीवन पथ नहीं सरल कोई मार्ग

पथरीले पथ से ना उखड़े घायल तेरे पांव

काहे पथ भ्रष्ट होकर करे ये तू विश्राम

आगे आने वाले पथ पर बाधा सर्प समान

मेहनत के एक पग से होती ऊंची उड़ान

मन से कभी ना हार रे तू तो सूर्य समान

ऊपर कुछ पंक्तियां आपको ये बताना चाहती है कि हम अक्सर कुछ नया करने से पहले भयभीत होते हैं

क्योंकि हार जाने का भय हमें अक्सर कुछ करने से रोकता है हम अपनी असफलताओं का सामना नहीं करना चाहते हैं

जो आप से ये अक्सर कहते हैं कि जीवन में आप कुछ नहीं कर सकते हैं तो इस प्रकार की बातें वहीं करते हैं जो खुद हार चुके हैं ऐसे लोगों के लिए दो पंक्तियां मैं कहना चाहूंगा

उनसे क्या उम्मीद करूं

जो नाउम्मीदी लगाये बैठे हैं

सूरज है उनके सामने फिर

भी खुद को बुझाये बैठे हैं

हमें प्रेरणा ही लेनी है तो उस जल से लेनी चाहिए जिसे रोकने के लिए मजबूत चट्टानों की दीवारें होती है फिर भी जल की इच्छा शक्ति उन चट्टानों को चीर कर अपना रास्ता बना लेती है जब मजबूत चट्टान जल को नहीं रोक सकती हम तो फिर भी मनुष्य हैं और भला हमारी इच्छा शक्ति हमारे प्रयासों का प्रभाव भला कोई रोक नहीं सकता

सामने है कर्मभूमि कर्म भी तेरे सामने

क्यों ना खुद प्रयास करूं तभी तो इसके मायने

हमे भी चट्टानों जैसी बाधाओं से लड़ना है और जीतना ही है

अंत में मैं ये कहना चाहूंगा

एक बार चले हम डर के उस पार

क्या पता हो जाए हमें डर से भी प्यार

मेरे ये कुछ शब्द अगर किसी को थोड़ी सी भी ऊर्जा देता है तो मुझे लगेगा मेरा प्रयास सफल हो गया

डर के आगे जीत है :- जो मनुष्य अपने भय पर काबू करके कार्य करता है तो उसे सफलता अवश्य मिलती है क्योंकि जब भी कोई व्यक्ति किसी कार्य को करने जाता है उसके मन में कहीं न कहीं जीतने और हारने की आशंकाएं रहती है उसके मन में एक प्रकार का द्वंद्व चलता रहता है जिससे कार्य के प्रति प्रबलता के बजाय दुर्बलता व्यक्ति पर हावी होने लगती है और जब मनुष्य इस दुर्बलता पर काबू पा लेता है अपने डर को खुद के प्रबल इच्छाशक्ति से काबू कर लेता है तो वो विजेता बन कर उभरता है और अपने डर पर जीत हासिल कर लेता है केवल अपनी हिम्मत और इच्छाशक्ति के बलबूते उस व्यक्ति के लिए संसार में कोई भी कार्य कठिन नहीं रहता और न ही उसके कार्यों पर डर का कोई प्रभाव पड़ता है क्योंकि उसने डर से लड़ना सीख लिया तथा जीतना भी सीख लिया है इसलिए कहते हैं डर के आगे जीत है

जीत के संबंध में कुछ प्रेरणादायक कथन:-

1. मुझे जीत इस शर्त पर चाहिए जिस जीत में सबके लिए कुछ न कुछ अवश्य हो

2. मेरी जीत केवल मेरा ही नहीं अपितु समाज का भी भाग्य तय करें

3. मेरी जीत तभी सार्थक है जब समाज परिवर्तन को नये उज्जवल भविष्य के रूप में देखे

4. जीत किसी की भावनाओं और बेबसी पर कब्जा जमाकर नहीं ली जा सकती क्योंकि यह जीत जल्दी ही पराजय बन जाती है

5. जीत वो है जो सदैव रहती है आप चाहें हो या ना हो

6. असली जीत उसी में है जो औरो के चेहरे पर मुस्कान ला दे

7. पराजय अगर सच कि राह में मिले तो ये हमारी जीत की संभावना को सौ गुणा बढ़ा देता है

8. अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़कर कोई विजेता नहीं बनता

9. अपने अधिकारों के लिए लड़ना भी विजेता कि ही निशानी है

10. सबसे बड़ी जीत अपने आप पर नियंत्रण ही है

कल्याणकारी विचार:- जीत अगर विश्वास की हो जीत अगर सच की हो जीत अगर प्रेम की हो जीत अगर शांति की हो जीत अगर सद्भावना की हो

जिस जीत में सबके कल्याण की भावना निहित हो वही तो असल मायने में जीत है जो जीत जीवन के मूल्यों को बताती है

जीतने में संधर्ष तो करने पड़ते हैं पर इन संधर्षो से ऊपर उठना ही तो जीवन मूल्यों की जीत है

हमारे जीवन पर पड़ने वाले इसके प्रभाव :-

हमारे जीवन पर इसके निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं

1. हम सदा संयमी बन जाते हैं

2. हम औरो की चिंता करने लगते हैं

3. हमारे लिए लोगों को देखने का नजरिया बदल जाता है

4. हम विकास पर अपना ध्यान केंद्रित करते हैं

5. हम परोपकार की आवश्यकता को समझने लगते है

6. इससे हमें लोगों के चेहरे पर मुस्कान की कीमत का अंदाजा होता है

7. हम खुद को भी एक अलग नजरिया से देखते हैं

8. हम समझ जाते हैं की स्वयं का विकास जब तक नहीं करेगा तब तक हम किसी का विकास नहीं कर सकते हैं

9. हमें लोगों की आवश्यकता और जरूरत की पूर्ति हेतु उनके संधर्ष का पता चलता है

10. हम प्रेम और परिवर्तन में विश्वास करने लगते है

दो पंक्तियां द्वारा वृतांत :-

सबके जीत में जो जिसका योगदान

दूसरे से प्रेम ही हो जिसका इनाम

वो रहे या न रहे मगर

सदा जग में सबसे ऊंचा हो उसका नाम

ऐसे विजेताओं को मै सदा करूं

झुक के प्रणाम

हमने क्या सीखा:- जीत वो है जिससे सबका कल्याण हो जिस जीत में मानवता विजयी हो वही तो जीत है जिस जीत में एक गहरा संतोष का भाव है और वो जीत सदैव स्थाई रूप में मौजूद हो जिसमें मानवता का धर्म ही सबसे बड़ा धर्म है

जिस जीत में जहां सदैव मुस्कान और हंसी गूंजती हो

और मानवीय चेतनाओं को जगाने का काम करें वहीं तो असली जीत है कभी -कभी मानवीय मूल्यों की जीत सबसे बड़ी होती है जिसमे हम किसी के चेहरे पर संतोष की मुस्कान साफ रूप से देख सकते है और किसी के चेहरे की मुस्कान हमारे चेहरे पर मुस्कान ले आती है और वो मुस्कान हम सदैव भूल नहीं पाते है www.kunal9july.com का एक प्रसंग

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